
जब किसी अपने से धोखा मिलता है, तो उसका दर्द शब्दों में बयां करना आसान नहीं होता। ऐसे समय में Dhokebaaz Shayari in Hindi लोगों के दिल की आवाज़ बन जाती है, जहां टूटे हुए भरोसे, अधूरी उम्मीदों और दिल के जख्मों को आसानी से व्यक्त किया जा सकता है। आज के दौर में शायरी सिर्फ लिखने या पढ़ने तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह एक ऐसा जरिया बन चुकी है जिसके जरिए लोग अपने अंदर छुपे दर्द को बाहर निकालते हैं। आसान और सीधे शब्दों में लिखी गई धोखेबाज शायरी हर उस इंसान को छू जाती है जिसने कभी न कभी किसी पर भरोसा करके चोट खाई हो।
अगर आप भी अपने जज़्बातों को सही शब्दों में ढालना चाहते हैं, तो धोखेबाज शायरी आपके लिए एक बेहतरीन तरीका हो सकती है। इसमें दर्द के साथ-साथ सच्चाई भी होती है, जो रिश्तों की हकीकत को सामने लाती है। ऐसी शायरी न केवल दिल का बोझ हल्का करती है, बल्कि हमें आगे बढ़ने और खुद को मजबूत बनाने की ताकत भी देती है। यही वजह है कि आज लोग अपने अनुभवों और भावनाओं को शायरी के जरिए व्यक्त करना ज्यादा पसंद करते हैं और इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बना चुके हैं।
Bewafa Dhokebaaz Shayari

कभी तेरी वफ़ा पर नाज़ था मुझे,
तेरे हर वादे पर ऐतबार था मुझे,
सच ने जब तेरी सूरत दिखाई,
सबसे बड़ा इल्ज़ाम था मुझे।
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मुस्कुराकर दिल में जगह बनाई तूने,
खामोशी से दूरी भी बढ़ाई तूने,
हमने रिश्ता समझकर साथ निभाया,
मगर हर मोड़ पर चाल चली तूने।
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रातों की नींद तुझ पर कुर्बान की,
हर सुबह तेरे नाम से पहचान की,
मगर जब निभाने की बारी आई,
तूने ही सबसे पहले अनजान की।
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आँखों में तेरी सच्चाई दिखी,
बातों में भी गहराई दिखी,
मगर वक्त ने सच जो खोला,
हर मुस्कान में परछाई दिखी।
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सफर की राह में साथ मिला,
दिल को जैसे कोई जज़्बात मिला,
पर सच के उजाले में जाना,
वो साथ भी बस हालात मिला।
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यकीन की डोर बड़ी मजबूत थी,
मोहब्बत भी बेहद खूबसूरत थी,
एक झूठ ने सब बिखेर दिया,
दिल की दुनिया ही बेजान थी।
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नाम तेरा दुआ में शामिल था,
हर लम्हा तुझसे काबिल था,
मगर तेरी नीयत ने बता दिया,
सब कुछ बस दिखावे में शामिल था।
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ख्वाबों का घर सजाया था,
तुझको ही सब बताया था,
जब सच सामने आकर खड़ा हुआ,
हर भरोसा टूट कर गिराया था।
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धड़कनों ने तेरा नाम लिया,
दिल ने तुझको ही काम लिया,
पर तेरे एक फैसले ने,
सब रिश्तों को विराम दिया।
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मंज़िल समझकर साथ चले,
हर मुश्किल में हाथ मिले,
पर तेरे बदलते रंगों ने,
सारे इरादे राख किए।
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तन्हा शाम ने सच सिखाया,
दिल ने भी सब अपनाया,
जिसे चाहा था जान से ज्यादा,
उसी ने सबसे पहले ठुकराया।
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रिश्ते की नींव भरोसे पर थी,
हर बात तेरी होशो-खबर थी,
पर सच की ठंडी हवा चली तो,
सब बातें ही बेअसर थीं।
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आवाज़ तेरी सुकून देती थी,
हर धड़कन को जूनून देती थी,
पर जब असली चेहरा सामने आया,
हर बात बस सज़ा देती थी।
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उम्मीदों का दीप जलाया था,
तेरे संग घर बसाया था,
मगर तूने एक पल में ही,
सब कुछ धुएं में उड़ाया था।
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सच की धूप जब पास आई,
तेरी परतें सब खुलवाई,
जिसे समझा था अपना साया,
वही सबसे बड़ी तन्हाई।
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वक़्त ने चेहरा साफ किया,
दिल ने रिश्ता माफ किया,
जिसे समझा था अपना हमदम,
उसने ही इनकार किया।
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कदम तेरे संग बढ़ाए थे,
हर ग़म में मुस्कुराए थे,
मगर तेरे बदलते अंदाज़ ने,
सारे ख्वाब जलाए थे।
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नज़रों ने जो देखा सच था,
दिल ने भी माना वही सच था,
पर तेरी फितरत ने बता दिया,
हर वादा बस झूठा वचन था।
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धुंधली यादें आज भी हैं,
आँखों में कुछ राज भी हैं,
पर तेरी बेवफ़ाई ने सिखाया,
रिश्ते कभी-कभी साज़ भी हैं।
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कहानी अधूरी रह गई,
मोहब्बत भी दूर रह गई,
जिसे समझा था अपना मुकद्दर,
वही सबसे बड़ी भूल रह गई।
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दिल ने तुझको खास कहा,
हर दर्द में तेरा नाम कहा,
पर तूने ही मोड़ पे आकर,
रिश्ते को बेनाम कहा।
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बारिश की रातों में याद आया,
तेरा हर वादा सताया,
पर सच ने आखिर बता दिया,
तूने ही सब झूठ बताया।
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खामोशी ने सच दोहराया,
दिल ने खुद को समझाया,
जिसे चाहा था पूरी शिद्दत से,
उसी ने सबसे ज्यादा रुलाया।
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रिश्ता तेरे नाम से जुड़ा था,
दिल भी तुझसे ही मुड़ा था,
पर सच ने जब परदा हटाया,
सब कुछ ही अंदर से टूटा था।
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अब दिल संभलकर धड़कता है,
हर चेहरा पहले पढ़ता है,
जिसने धोखा दिया कभी,
वो याद बनकर चुभता है।
Dost Dhokebaaz Shayari

दोस्ती के नाम पर जो करीब आया,
उसी ने सबसे पहले रंग दिखाया,
हमने दिल से साथ निभाया था,
उसने मौका देखकर हाथ छुड़ाया।
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साथ बैठकर जिसने सपने सजाए,
वही भीड़ में हमें भूल जाए,
यही समझ आया वक्त के साथ,
हर मुस्कान अपना नहीं कहलाए।
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राज़ जिन्हें दिल से बताया था,
वही हंसकर सबको सुनाया था,
हमने यकीन को रिश्ता माना,
उसने खेल समझकर निभाया था।
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कंधे से कंधा मिलाकर चलता था,
हर ग़म में साथ संभलता था,
मगर जब सच्चाई सामने आई,
वो सबसे पहले बदलता था।
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भरोसे की डोर मजबूत थी,
दोस्ती की नींव भी अटूट थी,
पर एक झूठ ने सब तोड़ दिया,
सच की जगह जब चाल घुस गई।
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नाम उसका आज भी याद है,
चेहरा भी उतना ही आबाद है,
मगर दिल जान चुका है अब,
वो दोस्त नहीं बस फ़रेब था।
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हंसी के पीछे जो साथ दिखा,
वही वक्त पर सबसे दूर दिखा,
दोस्ती का अर्थ बदल गया,
जब उसका असली रूप दिखा।
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सफ़र में जो हमसफ़र बना,
वही मोड़ पे बेअसर बना,
हमने सच्चाई थामी रखी,
वो झूठ का रहबर बना।
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बातों में अपनापन गूंजता था,
दिल को हर बार समझाता था,
मगर सच की हवा चली तो,
वही दोस्त सबसे दूर जाता था।
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यकीन की नींव जब हिली,
आँखों की चमक भी गई धुली,
जिसे समझा था अपना यार,
वही निकला चालाक असली।
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साथ निभाने की कसमें थीं,
हर पल की मीठी रसमें थीं,
मगर एक मौके ने साबित किया,
सब बातें बस औपचारिक थीं।
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दिल का आईना टूट गया,
दोस्ती का चेहरा छूट गया,
जिसे समझा था सच्चा साथी,
वही रास्ता बदल के मुड़ गया।
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आँखों ने जिसको भाई कहा,
दिल ने भी सबसे सच्चा कहा,
मगर वक्त ने साफ बता दिया,
वो रिश्ता ही कच्चा था।
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गहरी थी जो यारी कभी,
अब लगती है बीमारी कभी,
जिसे समझा था अपना साया,
वही दे गया खुमारी सभी।
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वक्त की धूप में सच पिघला,
दोस्ती का रंग भी निकला,
हम खरे रहे अपनेपन में,
वो ही सबसे पहले फिसला।
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राहों में जिसने हाथ थामा,
वही सबसे पहले बेगाना,
दोस्ती की कीमत तब समझी,
जब टूट गया हर अफ़साना।
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खामोशी ने राज़ बताया,
दिल ने भी सिर झुकाया,
जिसे समझा था सबसे अपना,
उसी ने सबसे ज़्यादा रुलाया।
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मौसम सा बदला उसका रंग,
हर वादा निकला बेढंग,
हम सच्चाई में डटे रहे,
वो फायदे की तरफ़ ही संग।
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कसमों की गूंज रह गई,
यादों की धूल रह गई,
जिसे समझा था दिल का यार,
बस तस्वीर भूल रह गई।
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चेहरे पर सादगी दिखी,
बातों में भी नरमी दिखी,
मगर असलियत सामने आई,
तो हर जगह स्वार्थ ही दिखी।
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हमने यारी को सम्मान दिया,
हर दर्द में उसे स्थान दिया,
मगर उसने मौका देखकर,
दिल को ही नुकसान दिया।
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मंज़िल तक साथ चलना था,
हर मुश्किल में ढलना था,
मगर मोड़ आया तो साफ हुआ,
उसे बस अपना ही फलना था।
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तन्हा शाम ने सच बताया,
दोस्ती का मतलब समझाया,
जिसे चाहा था दिल की गहराई से,
उसी ने सबसे पहले किनारा पाया।
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दिल अब संभलकर जुड़ता है,
हर चेहरा पहले पढ़ता है,
एक धोखा काफी था यारो,
अब भरोसा भी सोचकर करता है।
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सफर अभी जारी रहेगा,
दिल भी संभल ही जाएगा,
जिस दोस्त ने धोखा दिया,
वो सच से एक दिन टकराएगा।
Dhokebaaz Shayari 2 Line

जिसे माना था अपना साया,
वहीं सबसे दूर नजर आया।
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भरोसा किया था जिस नाम पर,
वही सबसे पहले इल्ज़ाम पर।
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जिसे अपना समझकर दिल सौंपा,
उसी ने रिश्ते का धागा तोड़ा।
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मुस्कान में जिसने प्यार दिखाया,
वक्त पर उसने रंग बदलाया।
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खामोशी को भी समझा था साथ,
वही खामोशी बनी जुदाई की बात।
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आँखों ने जिसको सच्चा माना,
दिल ने वही चेहरा पहचाना।
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वादों की गूंज अभी भी है,
पर नीयत की धुंध वही भी है।
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सपनों का घर उसी ने जलाया,
जिसे हमने दिल से बसाया।
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रास्ता उसका अलग निकला,
दिल का भरोसा वहीं फिसला।
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जिसे समझा था किस्मत अपनी,
वही निकला कहानी झूठी।
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नाम उसका दुआ में था,
पर सच किसी और हवा में था।
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साथ चलने की कसमें थीं,
मगर इरादों में बस रस्में थीं।
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दिल की बात उसे बताई,
उसने ही सबसे पहले सुनाई।
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भरोसे की नींव हिल गई,
सच्चाई की तस्वीर मिल गई।
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कदम उसके साथ बढ़ाए,
मोड़ पे उसने रुख बदलाए।
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चाहत में कोई कमी न थी,
पर उसकी नीयत वही न थी।
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धड़कन में उसका नाम रहा,
पर सच में बस इल्ज़ाम रहा।
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वक्त ने चेहरा साफ किया,
दिल ने रिश्ता माफ किया।
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ख्वाबों में जिसने घर बनाया,
उसी ने सबसे पहले गिराया।
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यकीन की डोर कमजोर हुई,
सच्चाई की जीत जरूर हुई।
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सच का सूरज जब निकला,
हर झूठ का रंग वहीं पिघला।
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नज़रों में जो साफ दिखा,
दिल ने वही सच लिख दिया।
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जिसे अपना मान लिया था,
उसी ने अनजान किया था।
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रात ने राज़ बता दिया,
दिन ने सच जता दिया।
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साथ उसका अधूरा निकला,
दिल का सफर भी फीका निकला।
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लफ्ज़ों में जो मिठास थी,
अंदर कहीं प्यास थी।
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नाम उसका जुबां पर रहा,
पर भरोसा कभी न रहा।
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जिसे दिल में जगह दी,
उसी ने सबसे पहले कमी की।
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कहानी उसकी साफ हुई,
मोहब्बत भी माफ हुई।
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चेहरा जो सच्चा लगता था,
अंदर से कच्चा लगता था।
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उम्मीदों का दीप बुझा,
दिल भी धीरे से चुप हुआ।
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साथ उसका नाम का था,
रिश्ता बस काम का था।
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जिसे अपना राज बताया,
उसी ने हंसकर फैलाया।
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दिल ने जिसको खास किया,
उसने ही उदास किया।
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मंज़िल समझकर साथ लिया,
रास्ते में ही हाथ दिया।
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सच्चाई जब सामने आई,
हर वादा झूठा कहलायी।
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कसमों की गूंज रह गई,
यादों की धूल रह गई।
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जिसे समझा था दिल का नूर,
वही निकला सबसे दूर।
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भरोसा करके पछताए,
सच जानकर संभल पाए।
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नाम उसका अब भी है,
पर दर्द भी वहीं है।
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दिल ने आखिर समझ लिया,
रिश्ता खुद ही कम लिया।
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वादा उसका टूट गया,
यकीन भी साथ छूट गया।
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जिसे चाहा पूरे दिल से,
वही मुड़ गया मंज़िल से।
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सफर का साथी निकला,
मगर सच्चा न निकला।
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आवाज़ उसकी मीठी थी,
नीयत मगर फीकी थी।
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साथ का बस नाम रहा,
दिल ही बदनाम रहा।
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खामोशी ने सच कहा,
दिल ने सब सहा।
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जिसे दिल से अपनाया,
उसी ने सबसे ज्यादा रुलाया।
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अब भरोसा सोचकर होगा,
दिल किसी पर कम ही होगा।
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धोखा जिसने दिया हमें,
सबक वही दे गया हमें।
Matlabi Rishte Dhokebaaz Shayari

हंसी में भी दूरी थी,
बातों में मजबूरी थी,
हम अपनापन ढूंढते रह गए,
वहाँ बस जरूरत पूरी थी।
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ज़रूरत की धूप में जो पास आते हैं,
काम निकलते ही दूर हो जाते हैं,
हम दिल से रिश्ते निभाते रहे,
वो फायदे से ही नाते बनाते हैं।
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चेहरों पर अपनापन सजा था,
अंदर कहीं स्वार्थ छुपा था,
हमने सच्चाई से हाथ बढ़ाया,
उन्होंने बस मौका पकड़ा था।
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जब तक उम्मीदों का भार रहा,
तब तक उनका भी प्यार रहा,
फायदा खत्म होते ही मगर,
हर रिश्ता ही बेकार रहा।
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बातों में मिठास बहुत थी,
नीयत में मगर प्यास बहुत थी,
हमने रिश्ते को सम्मान दिया,
उनके लिए बस तलाश बहुत थी।
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साथ निभाने की कसमें थीं,
हर दिन की नई रसमें थीं,
मगर सच्चाई सामने आई तो,
सब बातें बस औपचारिक थीं।
✦ ✦ ✦
हिसाब किताब में रिश्ते तौले गए,
हर वादे अलग से तोले गए,
हम सच्चे दिल से जुड़े रहे,
वो फायदे के पल ही बोले गए।
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जरूरत में हाथ थाम लिया,
काम हुआ तो नाम लिया,
फिर मुड़कर यूँ अनजान बने,
जैसे रिश्ता कभी न थाम लिया।
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स्वार्थ की डोर जब बंधती है,
सच्चाई वहीं पर मंद पड़ती है,
हम अपनापन ढूंढते रह गए,
उनकी नीयत वहीं मुड़ती है।
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रिश्तों की भी कीमत लगी,
हर बात में शर्तें जगी,
हमने दिल से चाहा जिन्हें,
उनकी सोच ही अलग चली।
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मुस्कुराहट में चाल छुपी थी,
बातों में ही ढाल छुपी थी,
हम सादगी में डूबे रहे,
वहाँ बस हर हाल छुपी थी।
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वक्त पड़ा तो साथ निभाया,
मौका मिला तो रंग दिखाया,
हमने जिनको अपना समझा,
उन्होंने ही हमें भुलाया।
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भरोसे की नींव हिलती गई,
सच्चाई धीरे मिलती गई,
जब चेहरा साफ नजर आया,
हर उम्मीद ही सिलती गई।
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नाम लिया था रिश्तों का,
पर काम किया बस किस्सों का,
हम दिल से जुड़े रहे हमेशा,
उनका मतलब था हिस्सों का।
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दिल से जो जुड़ते कम हैं,
स्वार्थ से जुड़े हर दम हैं,
हमने सच्चे रिश्ते चाहे,
वो बस अपने ही ग़म हैं।
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साथ उनका हाल तक था,
प्यार उनका सवाल तक था,
जवाब मिला जब सच का,
रिश्ता वहीं जाल तक था।
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उम्मीदों का दीप जलाया,
हर पल उनको पास बुलाया,
पर जरूरत पूरी होते ही,
उन्होंने चेहरा ही बदलाया।
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रिश्तों की डोर कमजोर हुई,
हर बात में ही खरोंच हुई,
हम सच्चाई में खड़े रहे,
वहाँ बस मतलब की खोज हुई।
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पास रहे जब लाभ मिला,
दूर हुए जब अभाव मिला,
हमने दिल से निभाया सब,
उनका साथ ही दांव मिला।
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स्वार्थ की छाया गहरी थी,
बातों में बस पहरी थी,
हमने चाहा साफ दिल से,
उनकी सोच ही बहरी थी।
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काम तक रिश्ता चलता था,
फिर अचानक ही ढलता था,
हम सच्चाई थामे खड़े रहे,
वो अवसर देख मचलता था।
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राहों में साथ दिखाई दिया,
वक्त पे सब सुनाई दिया,
सच की ठंडी हवा चली तो,
हर चेहरा परछाई दिया।
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दिल ने फिर भी यकीन किया,
हर शक को भी दफन किया,
मगर स्वार्थ के इस खेल में,
रिश्तों ने ही गुनाह किया।
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अब दिल संभलकर जुड़ता है,
हर चेहरा पहले पढ़ता है,
मतलब के इन रिश्तों से,
भरोसा धीरे-धीरे हटता है।
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सफर ने इतना सिखा दिया,
हर सच को साफ दिखा दिया,
मतलबी रिश्तों की दुनिया ने,
दिल को थोड़ा सख्त बना दिया।
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